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Tag Archives: मिर्झा ग़ालिब

सादगी पर उसकी मर जाने की हसरत दिल में है

सादगी पर उसकी मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता, की फिर खंज़र कफ़े-कातिल में है

देखना तकरीर की लज्जत कि जो उसने कहा
मैंने यह जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है

गरचे है किस-किस बुराई से, वले वा ई हमा
जिक्र मेरा मुझसे बेहतर है कि उस महफ़िल में है

बस, हुजूम – नौमीदी, खाक में मिल जाएगी
ये जो एक लज्जत हमारी सइ-ए-बेहासिल में है

रंजे -रह क्यों खिचिये खामान्दगी से इश्क है
उठ नहीं सकता हमारा जो कदम मंजिल में है

जल्वा-जारे-आतशे-दौजख हमारा दिल सही
फितना-ए-शोरे-कयामत किसके आबो-गिल में है

है दिले-शौरिदा-ए-ग़ालिब तिलिस्मे-पेचो-ताब
रहम कर अपनी तमन्ना पर कि किस मुश्किल में है……..~मिर्झा ग़ालिब

 
 

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