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कौन से सोने मैं !!

02 Apr

दूरसे देख रहा हूं मैं, तू है खुश तेरे कोने में
रहेना वहीं, भूलेसे ना देखना  मेरे कोने में

कितना प्यार था मुज़े, ख्वाब भी बहोत थे
एहसास अब है, मेरे पाँव थे अँधेरे कोने में
कैसे बजाता मैं ताली और वो मधुर साज़
रेतसे सज़ा रहाथा मेरा घर  तेरे कोने में

दूर ही रहेना अब आदत हो गई  मुजे अब
मैं भी हू खुश, बहोत ही खुश मेरे कोने में

जनक देसाई

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Posted by on April 2, 2012 in गजल, જનક દેસાઈ

 

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