हम तसव्वुर भी कैसे करें
की आप निगाह बदलेंगे
बसायाथा धडकनकी तराह तुम्हें दिलमें
गम-ए-जुदाई ( को ? ) कैसे सहलेंगे
बस एकही ख्वाहीसथी इस निगाहबानकी
शरीक-ए-गम बनकर जीलेंगे
सझा-ए-मौत से भी बदतर
खयाल-ए-खाम नावाकिफके युंही जीलेंगे
जनक देसाइ - ०४/०८/२००७
तसव्वुर imagine, contemplate
निगाह बदलेंगे give a cold shoulder, Become unfavorable
निगाहबानकी guardian
शरीक-ए-गम partner to share your pain
खयाल-ए-खाम misconception
नावाकिफ ignorant person
