जो गुज़र गया, उसे न याद कर
है जो गुम, एक पल ना बरबाद कर
जो है ना तेरी काबू में, काहे उनपे वार कर
बसा ले…..
एक दुनिया, सपनोकी…..
है न कभी वहां इंतजार
ना लूट सके कोई एक भी बार
०८-१७-2011
जो गुज़र गया, उसे न याद कर
है जो गुम, एक पल ना बरबाद कर
जो है ना तेरी काबू में, काहे उनपे वार कर
बसा ले…..
एक दुनिया, सपनोकी…..
है न कभी वहां इंतजार
ना लूट सके कोई एक भी बार
०८-१७-2011
Nice poem
Thank you, again for reading and visiting.
बहुत अच्छी कविता रची हे , धन्यवाद
आभार आपका, यहाँ आकर पढ़ने के लिए, और आपके सोच व्यक्त करने के लिए.
जनक